Wednesday, October 22, 2008
मशाल समाचार - आज की ताज़ा ख़बर
आज के मुख्य समाचार कुछ इस प्रकार हैं - सुबह सुबह की मूसलाधार बारिश और सब सदस्यों के दफ्तरों के समय अलग होने के कारण से 'खराशें' के रिहर्सल्स की बत्ती लगी हुई है - अक्सर वो तीन दीवारी जिसके अन्दर मशाल अभ्यास करता है, किन्ही अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहने लगी है जो कि बत्ती को और भी लंबा कर रहा है - हालत ये हैं कि १ तारीख आने में अब बस ८ दिन शेष हैं और किसी को ख़बर नहीं है कि पूरा नाटक एक साथ कैसा लगता है --
आज प्रातः ७ बजे कलाकारों ने कविता बोलने के अंदाज़ पर चर्चा कि और ऐसा प्रतीत होता है कि कविताओं पर काम का एक बड़ा हिस्सा समाप्त हो चुका है - वैसे ब्लोकिंग वगैरह तो लगभग निर्धारित हो गई है पर शायद ही किसी को पूर्ण रूप से इस का ज्ञान है - प्रकाश सज्जा काफ़ी बदलाव के बाद स्थायी होने का आश्वासन दे रही है परन्तु निर्देशकों की सुस्ती के चलते ध्वनि पर लेश मात्र भी उन्नति नज़र नहीं आ रही है - निर्देशकों ने इस विषय में कोई भी टिपण्णी करने से इनकार किया है और जनता से विश्वास बनाए रखने कि गुजारिश कि है --
अन्तिम समाचार मिलने तक माहौल में तनाव परन्तु स्थिति नियंत्रण में - ताज़ा घटनाक्रम जानने के लिए देखते रहिये मशाल समाचार - तब तक के लिए संवाददाता अभिनव किमोठी कि तरफ़ से मशाल प्रणाम
Tuesday, October 14, 2008
ज़रा सा आओ न बैठो, वतन की बात करें....
ये अल्फाज़ है गुलज़ार साहब की कविताओं और कहानियों पर आधारित नाटक 'खराशें' के..... और हाल फिलहाल मशाल इसी नाटक की तैयारी में जुटा हुआ है...... तैयारी है 'अभिनय' नाट्योत्सव की.....
सलीम आरिफ द्बारा संकलित 'खराशें' बंटवारे से अब तक हिन्दुस्तान में फैली फिरकावाराना वहशत को दर्शाता है...... नाटक की तीन कहानियाँ 'रावी पार', 'खौफ' और 'खुदा हाफिज़' हम प्रस्तुत करने जा रहे हैं..... पाँच किरदारों के इस नाटक में ध्वनि और प्रकाश का बेशतर इस्तेमाल करने का ख्याल है.....
सात महीने पीछे चलें तो अभिनय - ०७ में हमनें 'सिफर' का पहला मंचन किया था और माशाअल्लाह ढेर सारे इनामात भी जीते थे....... इंशाअल्लाह इस बार भी कोशिश है...... नवम्बर की पहली या दूसरी तारीख को प्रथम चरण होगा..... उम्मीद है की ८ नवम्बर को अन्तिम चरण में हम जे.एस.एस के प्रेक्षागृह में 'खराशें' का मंचन करेंगे...... आपकी दुआ रही तो उम्मीद ज़रूर कामयाब होगी......
प्रणाम