नमस्कार,
आज के मुख्य समाचार कुछ इस प्रकार हैं - सुबह सुबह की मूसलाधार बारिश और सब सदस्यों के दफ्तरों के समय अलग होने के कारण से 'खराशें' के रिहर्सल्स की बत्ती लगी हुई है - अक्सर वो तीन दीवारी जिसके अन्दर मशाल अभ्यास करता है, किन्ही अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहने लगी है जो कि बत्ती को और भी लंबा कर रहा है - हालत ये हैं कि १ तारीख आने में अब बस ८ दिन शेष हैं और किसी को ख़बर नहीं है कि पूरा नाटक एक साथ कैसा लगता है --
आज प्रातः ७ बजे कलाकारों ने कविता बोलने के अंदाज़ पर चर्चा कि और ऐसा प्रतीत होता है कि कविताओं पर काम का एक बड़ा हिस्सा समाप्त हो चुका है - वैसे ब्लोकिंग वगैरह तो लगभग निर्धारित हो गई है पर शायद ही किसी को पूर्ण रूप से इस का ज्ञान है - प्रकाश सज्जा काफ़ी बदलाव के बाद स्थायी होने का आश्वासन दे रही है परन्तु निर्देशकों की सुस्ती के चलते ध्वनि पर लेश मात्र भी उन्नति नज़र नहीं आ रही है - निर्देशकों ने इस विषय में कोई भी टिपण्णी करने से इनकार किया है और जनता से विश्वास बनाए रखने कि गुजारिश कि है --
अन्तिम समाचार मिलने तक माहौल में तनाव परन्तु स्थिति नियंत्रण में - ताज़ा घटनाक्रम जानने के लिए देखते रहिये मशाल समाचार - तब तक के लिए संवाददाता अभिनव किमोठी कि तरफ़ से मशाल प्रणाम
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Wednesday, October 22, 2008
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